खिलाफत क्या है?

खिलाफ़त क्या है ? खिलाफत इस्लामी शरीयत के अहकामात को नाफिज़ करने और पूरी दुनिया के सामने इस्लाम की दावत को पेश करने के लिये तमाम ...
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खिलाफत क्या है ? (मुतफर्रिक़ उसूल व क़वानीन)

मुतफर्रिक़ उसूल व क़वानीन 1. फक़त किताबुल्लाह, सुन्नते रसूलु (सललल्लाहो अलैहि वसल्लम) , इजमाऐ सहाबा और क़यास ही शरई अहकामात अखज़ करने क...
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खिलाफत क्या है? (इस्लामी तालीमी पालिसी)

इस्लामी तालीमी पालिसी 1. तालीम का बुनियादी मक़सद इस्लामी शख्सियत पैदा करना और तालिबे इल्म को ज़िन्दगी के मसाईल को मुताल्लिक़ उलूम औ...
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खिलाफत क्या है? (मुआशारती निज़ाम)

मुआशारती निज़ाम 1. इफ्फत और अज़मत की हिफाज़त को बुनियादी हैसियत हासिल है. चुनाचे मर्द और औरत पर तोहमत लगाने वाले को सख्त सज़ा दी जाएगी. नै...
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खिलाफत क्या है? (खारजा पालिसी)

खारजा पालिसी 1. इस्लाम की दावत और उसके निज़ामो का फरोग खारजा पोलिसी की बुनियाद और असास होती है. जिसका अमली तरीक़ा दावत और जिहाद होगा ...
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खिलाफत क्या है? (इस्लामी निज़ामे अदल)

इस्लामी निज़ामे अदल 1. तमाम मुक़दमात का फैसला सिर्फ और सिर्फ अल्लाह के क़वानीन के तहत किया जाता है. जज का फैसला हतमी होता है. उसे किसी ...
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खिलाफ़त क्या है? (इक़तसादी निज़ाम)

इक़तसादी निज़ाम 1. इस्लाम मे कुछ मुतय्यन टेक्स और सदक़ात है मसलन खिराज , उशर , जिज़या , ज़कात , खुम्स और हंगामी हलात मे सिर्फ़ अमीरों प...
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खिलाफ़त क्या है? : हुकूमती निज़ाम

हुकूमती निज़ाम 1. खलिफ़ा अवाम के बिलवास्ता या बिलावास्ता इन्तिखाब से मुन्तखिब होता है. मुन्तखिब होने वाला उम्मिद्वार उम्मत कि...
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इस्लामी सियासत

इस्लामी सियासत
इस्लामी एक मब्दा (ideology) है जिस से एक निज़ाम फूटता है. सियासत इस्लाम का नागुज़ीर हिस्सा है.

मदनी रियासत और सीरते पाक

मदनी रियासत और सीरते पाक
अल्लाह के रसूल (صلى الله عليه وسلم) की मदीने की जानिब हिजरत का मक़सद पहली इस्लामी रियासत का क़याम था जिसके तहत इस्लाम का जामे और हमागीर निफाज़ मुमकिन हो सका.

इस्लामी जीवन व्यवस्था की कामयाबी का इतिहास

इस्लामी जीवन व्यवस्था की कामयाबी का इतिहास
इस्लाम एक मुकम्म जीवन व्यवस्था है जो ज़िंदगी के सम्पूर्ण क्षेत्र को अपने अंदर समाये हुए है. इस्लामी रियासत का 1350 साल का इतिहास इस बात का साक्षी है. इस्लामी रियासत की गैर-मौजूदगी मे भी मुसलमान अपना सब कुछ क़ुर्बान करके भी इस्लामी तहज़ीब के मामले मे समझौता नही करना चाहते. यह इस्लामी जीवन व्यवस्था की कामयाबी की खुली हुई निशानी है.