अगर कल खिलाफत क़ायम हो जाये! (महकमा बराए तालीम)

महकमा बराए तालीम व सक़ाफत
(Department of Education)

खलीफा इस महकमे का सरबराह मुक़र्रर करेगा जो फौरन नया तालीमी निसाब के आने के बाद ही स्कूलों और कालिजों में पढाई शुरू होगी. इस अर्से में तमाम तालिबे इल्म फौजी तरबियत हासिल करेंगे ताकि बवक्ते ज़रूरत उन की खिदमात हासिल की जा सकें. यह महकमा पूरी मुस्लिम दुनिया में एक सक़ाफती इंक़लाब का आग़ाज़ करेगा जिस के लिये तशहीर और मिडिया की तमाम सहूलियात से फायदा उठाया जायेगा।



इस्लामी सक़ाफत के फरोग़ के लिये मुख्तलिफ क़ुतुब इकट्ठी की जायेगी जिसमें में फिक़ही क़ुतुब और मुख्तलिफ सियासी जमातों की कुतुब होंगी जो की इस्लामी निज़ाम के निफाज़ के लिये काम कर रहे हैं और निज़ाम के बारे में एक सोंच रखते है, शामिल होगी मसलन हिज़्बुत्तहरीर. इन कुतुब को छपवा कर उम्मत में तक़सीम किया जायेगा, यह सक़ाफत बहस व मुबाहिसे के ज़रिये उम्मत तक पहुंचाई जायेगी, इसके अलावा मीडिया यानी मेग्ज़ीन, अखबारात, रेडियो और टी.वी. का भी भरपूर इस्तेमाल किया जायेगा, एक खास पालिसी अपनाई जायेगी ताकि मुआशरे में इस्लामी शख्सियत की तामीर की जा सके.

यह महकमा ऐसी तालीम की तरफ खास तवज्जोह देगा जो के मुस्तक़बिल में उम्मत के लिये मुफीद साबित हो, मसलन डाक्टर्स, इंजीनियर्स, सनअतकार, कमप्यूटर इंजीनियर्स, या गोला बारूद के माहिर. इस पालिसी में फलकियात, कीमिया और फिज़िक्स के मज़ामीन भी शामिल होंगे. ऐसे मज़ामीन जो के उम्मत के किसी खास काम के नहीं उन को निसाब से निकाल दिया जायेगा मसलन जदीद ज़बाने, स्पोर्टस, क़ानून, बेंकिंग वग़ैराह. साथ ही साथ, फरसफा, नफ्सियात, और इम्रानियात वग़ैराह को भी खत्म कर दिया जा
येगा, तमाम स्कूलों, कॉलिजो, और शहर में मुख्तलिफ जगहों पर लेबोरेटरियां और लायब्रेरियाँ क़ायम की जायेंगी. तमाम मौजूदा स्कूल, कालिज और यूनिवर्सिटियाँ खुली रहेंगी बल्कि वोह इमारत जो की मौजूदा हुकूमत के मुख्तलिफ इदारे बन्द करने की वजह से खाली होगी, को भी यूनिवर्सिटियों में तबदील कर दिया जायेगा. यह तमाम इख्तियारात मरकज़ी हुकूमत के साथ-साथ इलाक़ाई हुकूमत के पास भी होंगे. यह महकमा मुख्तलिफ स्कूलों में हेडमास्टर्स तैनात करेगा जिस का काम बाक़ी असातज़ा की तैनाती होगी. ऐसा निसाब तरतीब दिया जायेगा की तालिबे इल्म कम वक़्त में आला तालीम के अहल बन सकें।



महकमा मसाजिद का इंतेज़ाम भी सम्भालेगा और वज़ारते औक़ाफ को खत्म कर दिया जायेगा. मसाजिद फिक़, तफ्सीर, अहादीस, और सीरत की तदरीस का काम सम्भालेगी।



सिर्फ रियासत की तरफ से मंज़ूर शुदा निसाब ही स्कूल में पढाया जा सकेगा. नई रिसर्च और इजादात पर रियासत की तरफ से खुसूसी इनामात दिये जायेंगे ताकि इस अमल की होंसला अफज़ाई हो सके. रियासत हर वोह चीज़ छापेगी (खरीद कर) जो के उम्मत के लिये मुफीद हो. यह महकमा सनअत के महकमे के साथ खुसूसी तआवुन करेगा ताकि जदीद साईंसी तालीम के शोबे में मज़ीद बहतरी लाई जा सके. अदवियात के शोबो में रिसर्च करने वाले असातज़ा और तालिबे इल्म महकमाऐ सेहत के साथ बाहम राब्ते में रहेंगे.
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